पत्रकार की मौत पर दो लाख और आरएसएस कार्यकर्ता को पांच लाख की मदद

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भाजपा का असली चेहरा: BJP अध्यक्ष अमित शाह के सामने बौने साबित हुए CM शिवराज, कार्यकर्त्ता की मौत के बाद परिजनों को दिए पांच लाख

ग्वालियर। भारतीय जनता पार्टी के लिए अपने कर्तव्य का ईमानदारी से निर्वहन कर जान गंवाने वाले पत्रकार से कहीं ज्यादा आरएसएस का कार्यकर्ता महत्वपूर्ण है। पत्रकार की मौत से अधिक कार्यकर्ता की मौत भाजपाइयों को विचलित करती है। यही वजह है कि पत्रकार का ताजा मामला होने पर प्रदेश सरकार के मुखिया महज दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा करते हैं। वहीं दूसरी ओर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरएसएस कार्यकर्ता की मौत के डेढ़ साल बाद उसके घर पर जाकर पांच लाख रुपए का चेक परिजनों को प्रदान करते हैं।
जानिए क्या है पूरा मामला                                                                                                  पहला प्रकरण
भिंड में इसी सप्ताह प़त्रकार संदीप शर्मा सड़क हादसे में मारे गए। माना जा रहा है कि खनन माफिया द्वारा उनकी हत्या कराई गई है। शुक्रवार को राजधानी भोपाल में प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मृतक के परिजनों को दो लाख रुपए की आर्थिक मदद की जाएगी साथ ही सरकार उनके बच्चों की पढ़ाई के लिए भी व्यवस्था करेगी।                                                                                                             दूसरा प्रकरण
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कर्नाटक के मैसूर में आरएसएस कार्यकर्ता राजू के घर पहुंचकर उनके परिजनों को पांच लाख रुपए का चेक प्रदान किया। राजू की डेढ़ साल पहले मौत हो गई थी। आपको बता दें कि कर्नाटक में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है।                                                                        कांग्रेस ने की चुनाव आयोग से शिकायत
आरएसएस कार्यकर्ता के परिजनों को आर्थिक सहायता देने पर अमित शाह के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। जिसमें कहा गया है कि चुनाव के ऐलान के बाद अमित शाह ने आचार संहिता का उल्लंघन किया है। चुनाव आयोग से कांग्रेस ने शिकायत करते हुए कहा कि शाह ने मैसूर में आरएसएस कार्यकर्ता के परिवार को पांच लाख रुपए का चेक दिया है। उन्होंने यह चेक देकर मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने की कोशिश की है। अमित शाह और भाजपा नेताओं का यह कदम आचार संहिता के उल्लंघन के साथ आईपीसी की धारा 171 बी का भी उल्लंघन है।

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