सिंधिया को सीएम प्रोजेक्ट करने का राग नहीं आया समर्थकों के काम

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महाराजा सिंधिया की जय-जय कार करने वाले सिंधियानिष्ठ और उनके साथ समानान्तर कांग्रेस की लॉबिंग कर रहे दिग्विजय सिंह समर्थकों ने तीन वर्ष के अंदर दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व को लेकर कार्यकर्ताओं की अहमियत के सवाल पर जो जहर घोला था उसका प्रभाव कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की जांच एजेंसियों द्वारा की गई पड़ताल में दिखाई और सुनाई दिया है।                                               शिवपुरी राकेश शर्मा |                                                                                                        मध्यप्रदेश में तीसरी बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के एक वर्ष बाद ही कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेताओं में एकजुटता को लेकर सक्रियता दिखाई देने लगी थी। ग्वालियर चंबल में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पूरी ऊर्जा के साथ कार्यकर्ताओं को जोडने का प्रयास करते हुए मप्र की तरफ अपने कदम बढ़ाए थे। महाराजा सिंधिया की जय-जय कार करने वाले सिंधियानिष्ठ और उनके साथ समानान्तर कांग्रेस की लॉबिंग कर रहे दिग्विजय सिंह समर्थकों ने तीन वर्ष के अंदर दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व को लेकर कार्यकर्ताओं की अहमियत के सवाल पर जो जहर घोला था उसका प्रभाव कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की जांच एजेंसियों द्वारा की गई पड़ताल में दिखाई और सुनाई दिया है। नेतृत्व के अहंकार और दंभ की चपेट में सिंधिायानिष्ठ कार्यकर्ता अपने गुबार को उस वक्त नहीं रोक पाया जब मप्र में विधानसभा चुनाव 2018 को लेकर नेतृत्व परिवर्तन के साथ सीएम प्रोजेक्शन की बात पर उसकी गोपनीय तरीके से राय जानने का जांच एजेंसियों ने प्रयास किया। जांच एजेंसी को सिंधिया के मामले में विरोधाभासी बयान देकर अपना गुबार निकालने वाले अधिकांश सिंधियानिष्ठ कमलनाथ की ताजपोशी के बाद अब मायूस चेहरा बनाकर घूमते दिखाई दे रहे है।सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शिवपुरी शहर में टे्रक्टर चलाकर, आदिवासी के घर भोजन चालू करके और सार्वजनिक आयोजनों में महिलाओं के साथ पूड़ी बेलते हुए इन्फ्रास्ट्रेक्चर के लिए जो प्रयास किए थे और अपनी महाराजियत की छवि को आम आदमी के बीच मिटाते हुए तीन वर्ष पूर्व से ही अपने कदम मप्र की ओर बढ़ा दिए थे। स्वीकार्यता और सम्मोहन के साथ सांसद सिंधिया की लोकप्रियता बढ़ती चली गई। अबकी बार सिंधिया सरकार के नारों ने सांसद में पूरा जोश भर दिया था सिंधिया अपने मजबूत कदमों के साथ कांग्रेस हाईकमान के बलबूते पर जिस मंजिल की ओर बढ़ रहे थे वह उन्हें नहीं मिलेगी इसका अंदाजा भी उनको नहीं था और उस धूमिल होती सफलता में उनके अपने ही समर्थकों की राय घी में आग डाल देगी यह उन्होंने स्वप्न में भी नहीं सोचा होगा।

यहां गौरतलब है कि सांसद सिंधिया और दिग्विजय सिंह के समर्थकों की बात की जाए तो दिग्विजय सिंह समर्थक अपने नेतृत्व के प्रति आत्मबल से लबरेज हमेशा दिखाई दिए है। मान-सम्मान के साथ आथर््िाक पृष्ठभूमि पर भी दिग्विजय सिंह का जो नजरिया है उससे उनमें हमेशा ऊर्जा का संचार होता नजर आया है। वहीं सिंधिया समर्थकों की अहमियत सार्वजनिक कार्यक्रमों को छोड़कर निजी तौर पर अपने नेतृत्व के प्रति भरोसेमंद दिखाई नहीं दी है, यह बात पिछले तीन वर्षों में दिग्विजय समर्थकों के साथ कांग्रेस की एकजुटता के कारण काम करते हुए सिंधियानिष्ठों ने महसूस भी की है। जिसको दिग्विजय सिंह समर्थकों ने भांपते हुए पिछले तीन वर्षों में सांसद सिंधिया की कार्यप्रणाली को लेकर सिंधियानिष्ठों में जो आग झोंकी थी वह ज्वाला बनकर हाईकमान की पड़ताल में फूटती दिखाई दी।

कांग्रेस हाईकमान को मप्र में निर्णय करने से पूर्व जो धरातल की रिपोर्ट तैयार करवाना थी उसमें कमलनाथ और सांसद सिंधिया के बीच से निर्णय करना था और हुआ भी ऐसा ही। जांच एजेंसियों ने मप्र स्तर पर जो जानकारी एकत्रित की उसके बारे में कोई राय व्यक्त करना इस संवाददाता की अपूर्ण जानकारी ही कहना होगा, लेकिन सूत्रों के मुताबिक जिला शिवपुरी के अधिकांश सिंधियानिष्ठ कार्यकर्ताओं ने जिनमें पूर्व विधायक, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष, युवक कांग्रेस, ब्लॉक एवं नगरीय निकाय और जिला-जनपद के प्रतिनिधियों ने हाईकमान की जांच एजेंसियों द्वारा की गई टेलीफोनिक बातचीत में अपने गुबार निकाले है और साफ तौर पर कहा है कि सांसद सिंधिया कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं देते है। जमीनी स्तर के कार्यकर्ता को सिंधिया तक अपनी बात पहुंचाने में बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। पूॅंजीवाद के सहारे संगठन को सक्रिय करने की कार्य योजना सांसद सिंधिया के निजी चुनाव में तो सार्थक होती है और होती भी रहेगी, लेकिन मप्र के विधानसभा चुनाव की दृष्टि से इसमें बहुत सुधार की जरूरत है।

यहां गौरतलब है कि सांसद सिंधिया की कार्यप्रणाली धरातल पर इन्हीं दिनों हाईकमान के संज्ञान में नहीं आई है बल्कि तीन वर्ष पूर्व भी कमलनाथ ने अपनी स्वीकार्यता को लेकर मप्र स्तर पर बनाने के लिए जो पुस्तक का प्रकाशन किया था उसमें भी कई लोगों ने खुले तौर पर सिंधिया के नेतृत्व के खिलाफ बयानबाजी की थी। अब जब कमलनाथ के हाथ में मप्र कांग्रेस कमेटी की कमान है और सत्ता परिवर्तन के इस महत्वपूर्ण पद पर उन्हें जिम्मेदारी मिली है तो इससे इंकार भी नहीं किया जा सकता कि कांग्रेस के बहुमत आने पर उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में नवाजा जा सकता है। सांसद सिंधिया की कार्यप्रणाली को लेकर जांच एजेंसियों के सामने अपने गुबार निकालने के बाद अब सिंधियानिष्ठ मायूस

होकर कांग्रेस और प्रदेश हाईकमान के पक्ष में बयानबाजी कर रहे है कितनी विचित्र बात है कि सांसद सिंधिया की स्वीकार्यता जहां मप्र में आंकी जा रही थी उसको दरकिनार करके जो निर्णय हुआ है उसको लेकर कोई भी सिंधियानिष्ठ सीधे तौर पर कोई भी बात करने से कतरा रहा है। यह इस बात का प्रमाण है कि हाईकमान की पड़ताल संबंधी जो जानकारी सूत्रों के मुताबिक प्राप्त हुई है वह बाकई धरातल पर भले ही सिंधिया की स्वीकार्यता का वजूद देती हो लेकिन सिंधियानिष्ठों के दिल में सांसद की कार्यप्रणाली अब दिल जीतने वाली नहीं लगती है।

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