अवैध पटाखों में सुलग रहा बिलासपुर शहर.. दीपावली आते ही शुरू हो जाता खेल..

संवददाता संतोष साहू/
बिलासपुर- दीपावली त्यौहार में अवैध पटाखों का व्यापार करने वाले जगह-जगह सक्रिय होने लगे है जिन पर प्रशासन नकेल कसने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है जहाँ अवैध पटाखों के महारथी व्यापारीयों पर पुलिस दबिश देकर पकड़ना शुरू भी कर दी है।
मालूम हो कि दीपावली त्यौहार के समय अवैध पटाखों का खेल चालू हो गया है जिसमे शहर के नामी पटाखा व्यापारी व्यापक पैमाने पर अवैध पटाखों का व्यापार कर रहे है जिन्हें पकड़ पाने में पुलिस ज्यादातर नाकामयाब रहती है और प्रशासन की नाक के नीचे यह पटाखा व्यापारी धडल्ले से अपना काम करते रहते है। एक मामले में बीती रात सिविल लाईन पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर कस्तूरबा नगर इलाके के एक मकान में छापामार कार्रवाई करते हुए पटाखों का जखीरा बरामद किया है। जब्त किए गये अवैध पटाखे बड़े और धमाकेदार आवाज वाले है।
सीविल लाइन पुलिस ने राम बजाज के कस्तूरबा नगर इलाके के घर में जब दबिश दी तो पटाखों के भरे हुए 17 कार्टून जिनमें छोटे पटाखों के अलावा तेज़ आवाज वाले पटाख़े बरामद किए गए। इतने बड़े स्तर से बिना कोई सुरक्षा इंतजाम के रखे पटाखें किसी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते थे फिलहाल पुलिस ने सारे पटाखों को जप्त कर थाने में रखी हुई है लेकिन जब्त किये गए पटाखे से थाने की सुरक्षा का कोई इंतेजाम नही है। कमोबेश यही हाल छत्तीसगढ़ के हर शहर और कस्बो का है हमारा मात्र यही कहना है कि व्यक्तिगत स्वार्थ की ख़ातिर मतमिय भूलो के चलते बड़ी त्रासदी न हो।
शहर के इन जगहों पर क्यो नही होती कर्यवाई..??
शहर में बड़े-बड़े पटाखा व्यापारियो की सक्रियता से लगातार कई वर्षों से वृहद पैमाने पर पटाखो का व्यापार हो रहा है जिनमे मुख्य रूप से शहर के हृदत स्थल सदर बाजार में एक ही कुटुम्ब के दो परिवार है जो प्रतिवर्ष स्वयं के निवास जो कि घनी आबादी वाला क्षेत्र है पर वृहद पैमाने पर धडल्ले से पटाखे का व्यापार करते है। इनके द्वारा भारी मात्रा में पटाखे शहर के बीचोबीच पटाखों का भंडारण करने से किसी अप्रिय घटना होने की संभावना बनी रहती है जिससे जन-धन की भारी हानि हो सकती है। इसके अलावा नगर के शनिचरी बाजार, बुधवारी बाजार, खपरगंज, राजेन्द नगर , राजकिशोर नगर, सरकण्डा, कुदुदण्ड जैसे रिहायशी इलाको में भी पटाखे का व्यापार होता है। विगत वर्ष पुलिस ने जगह-जगह छापेमार कर्यवाई की लेकिन सदर बाजार के व्यापारियों पर ही मेहरबान क्यो रहती है।

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